What Our Clients Say

  • Shri Suresh Bharadwaj, Astrologer of Ulhasnagar met me today and predicted some events. I am convinced that he is a very good Predictor. I wish him success in his life.

    -S.M. Shangari

  • I am overwhelmed by the guidance of Suresh Sir. Thank you.

Shani 2017

● शनि 2017

••••••• शनि राशि बदलकर धनु में प्रवेश करेगा, सीधे मूला-नक्षत्र में संचार करेगा । गुरु बृहस्पति शत्रु राशि में है और निर्बल है । गुरु बृहस्पति के निर्बल होने से सुधार और रचनात्मकता की प्रक्रिया थमी रहेगी और पाप ग्रह उत्पात करेंगे । राहु-केतु – वर्ष के मध्य में राशियां बदलेंगे । ये ग्रह-योग दर्शाते हैं कि – ये वर्ष सहज और सरल नहीं है ।
ये वर्ष – समय, सम्बन्ध और संचार की जटिलता का है । समय निरंतर बदलता रहेगा और असमंजस तथा उलझनों का निर्माण करता रहेगा । संबंधों की नयी परिभाषा बनेगी और वैचारिक मतभेद – संबंधों की सीमायें तय कर देंगे । संचार पर निर्भर रहने वाली ये दुनियाँ खुद को अफवाओं से नहीं बचा पायेगी और ये काम संचार माध्यम खुद ही करेगा । लोग अपने आप में सिमट जायेंगे और किसी पर विश्वास नहीं करेंगे ।
संचार और संबंधों का कारक बुध है – शनि – बुध के नक्षत्र – ज्येष्ठा में है । गुरु बृहस्पति – बुध की राशि कन्या में है । इसलिये बुध बुनियाद में है । जैसे ही शनि – धनु-राशि में प्रवेश करेगा – बुध की बुनियाद हिल जायेगी । केतु का नक्षत्र बुध के प्रभाव को समाप्त कर देगा और समय रहस्यमय आवरण से लिपट जायेगा । केतु रहस्यमयी ग्रह है और बुध का शत्रु है । इससे संबंधों की नयी परिभाषा बन जायेगी और संचार माध्यम अफवाओं को जन्म देने लगेगा अर्थात संचार माध्यम भय का वातावरण निर्माण करने लगेगा । शनि जोकि समय का कारक है । पहले बुध के नक्षत्र से केतु के नक्षत्र में संचार करेगा फिर केतु के नक्षत्र से बुध के नक्षत्र में संचार करेगा । नक्षत्र तो अदल-बदल करेगा ही राशियां भी बदलेगा । ऐसा वो 21 ऑक्टोबर तक करता रहेगा । अर्थात लगभग पूर्ण वर्ष ऐसा ही करता रहेगा । इससे संपूर्ण वर्ष – समय की उथल-पुथल चलती रहेगी और लोग भविष्य की योजनायें नहीं बना पायेंगे । गुरु बृहस्पति संपूर्ण वर्ष शत्रु राशियों में संचार करता रहेगा । पहले कन्या राशि में फिर वर्ष-मध्य से तुला राशि में संचार करेगा जिससे उसकी निदान प्रस्तुत करने की क्षमता प्रभावित होगी । लोग समस्याओं के उपाय और परिहार नहीं तलाश कर पायेंगे ।
बुध के कारण ही संचार व्यवस्था ठप्प हो सकती है, लोग अपने फोन इस्तेमाल नहीं कर पायेंगे तथा इंटरनेट व्यवस्था बाधित हो सकती है और आपस के संपर्क-सम्बन्ध टूट सकते हैं । जन-साधारण को वैकल्पिक व्यस्थाओं के विषय में सोचना होगा ।
26 जनवरी, 2017 को शनि – धनु राशि में प्रवेश करेगा और इसके साथ ही केतु के नक्षत्र मूला में भी संचार करने लगेगा । मूला नक्षत्र चमकदार, अग्निकारक और मोक्ष कारक है । शनि धर्म-पारायण, कर्तव्य-पारायण और कर्म-कारक है । मूला नक्षत्र से इसका तालमेल धर्म की कट्टरता को बढ़ावा देगा । धार्मिक कट्टरतावाद से दुनिया का तीव्रता से ध्रुवीकरण होगा और मोक्ष-कारक केतु के प्रभाव से मृत्यु दर बढ़ेगी । आतंकवाद का एक नया चेहरा सामने आ सकता है । शनि के कारण दुनियाँ कर्मफल की और अग्रसर होगी और जिसने जैसा किया है उसे वैसा फल मिलेगा । युद्ध के बादल और घने होंगे तथा रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल से दुनियाँ सिहर सकती है । केतु – रसायन का कारक है अचानक चौका देने का फल कर सकता है ।
खाड़ी देशों को विशेष रूप से याद रखना होगा क्योंकि धर्म के नाम पर सबसे ज्यादा उठापटक वही होती आयी है । युद्ध की आग तो वहां सुलग ही रही है – शनि के वक्रि होते ही ये आसपास फ़ैल सकती है ।
ऐसी शंकायें भी हैं कि – इस बार विश्व-युद्ध देशों के बीच नहीं बल्कि सभ्यताओं के बीच होगा । ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, पाकिस्तान, भारत और दुनियां भर में कई जगहों पर आतंकवादी हमलों से ऐसा वातावरण लगभग तैयार भी हो चुका है ।
दुनियां में जब शक्ति-संतुलन बिगड़ने लगे, एक साथ कई शाक्ति-स्तंभ उभर आयें और छोटे-बड़े देश एक-दूसरे पर दबाव बनाने लगे तो समझना होगा कि – तृतीय विश्व-युद्ध की भूमिका बन रही है ।
केतु – शनि की राशि में है और शनि – केतु के नक्षत्र में होगा – ये योग भयंकर अग्निकांडों को जन्म दे सकता है । गुरु बृहस्पति और शनि के निर्बल होने से ‘वायु-तत्व’ के अनुपात में घटबढ़ होगी जिससे आंधी-तूफ़ान और वायुयान दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जायेगी । बुध के नक्षत्र से निकलकर केतु के नक्षत्र में संचार और फिर अचानक वक्रि होकर फिरसे बुध के नक्षत्र में प्रवेश से शनि – व्यापार-व्यवसाय को और शेयर मार्केट को अकल्पनीय उतार-चढ़ाव प्रदान कर सकता है ।
बीच-बीच में जब कभी गुरु बृहस्पति को बल मिलेगा तो कुछ राहत अथवा सुधार की संभावना होगी लेकिन इससे भरपाई और सुधार उतना नहीं हो पायेगा जितनी हानि होगी । बुध के नक्षत्र में वक्रि शनि के लौट आने से भी हालात के बेहतर होने का अंदेशा होगा जबकि हालात और खराब होंगे । ये वर्ष राहु-केतु और शनि के प्रभाव का है । इनकी सक्रियता दुनियाँ में उथल-पुथल प्रकट करेगी । हालांकि समय-समय पर शुक्र, बुध और चंद्र शुभ होकर कुछ समय की राहत और शाँति दे सकते है और ऐसे ही समय में जन-साधारण को अपने कार्य बना लेने का प्रयास करना होगा । समय कम होगा और कार्य अधिक लेकिन जितना बन सके उतना बना लेना ही बुद्धीमानी होगी । ऐसे समय में अपने विवेक से काम लेना होगा और तत्पर बुद्धी से कार्य करना होगा ।
ईश्वर सबकी रक्षा करे ।
अगले भाग में जारी ——-
सुरेश भारद्वाज – उल्हासनगर, मुम्बई.